डिस्टेंस लर्निंग से ग्रेजुएशन कैसे करें | Distance Learning se Graduation Kaise Karen

अगर आप जानना चाहते हो की डिस्टेंस लर्निंग से ग्रेजुएशन कैसे करें? तो हमने इस लेख में डिस्टेंस लर्निंग के बारे मैं सभी महत्वपूर्ण जानकारी दिया है। हमारे देश में बहुत सारे ऐसे Students हैं जो 12वीं के बाद पढ़ाई करने में असमर्थ है या फिर उनके सामने कुछ समस्याएं आती है जिसके वजह से Graduation की पढ़ाई करने में असमर्थ हो जाते हैं, फिर आपके सामने यही एक Option होता हैं पढाई पूरी करने के लिए।

अगर आप कही Job करते हो, Business करते हो और MBA करना चाहते हो तो ऐसे मैं कोई सारे ऑप्शन आपको मिलते हैं जहां से अपने Education को आगे लेकर जा सकते हो। बहुत सारे ऐसे Student है जो अपने Education को बीच में छोड़ दी है या फिर किसीभी कारन ब्रेक हो गया है तो ऐसे मैं आप Distance पे रहके Education स्टार्ट कर सकता है फिर चाहे आप किसी भी एज में हो।

2016 से 2018 तक 6.6 मिलियन से ज्यादा छात्रों ने दूरस्थ शिक्षा में Admission लिया था, और जैसे ही कोरोना काल यानि COVID-19 सुरु हो गया, यह संख्या 400 मिलियन तक पहुंच गई। ऐसे Students जो Regular पढ़ रहे थे वो भी एकतरह से डिस्टेंस एजुकेशन मे आ गए। डिस्टेंस एजुकेशन में आप कोई सा भी कोर्स करके Graduation करना चाहते हैं तो कर सकते हो। दो-तीन सालों के अंदर अंदर बहुत सारी Private University को Approval मिल गया हैं, जो Distance Learning के जरिये पढाई करके Graduation कर सकते हैं।

डिस्टेंस लर्निंग क्या है/What is Distance Learning?

अगर आप जानना चाहते हो डिस्टेंस लर्निंग क्या है ? तो आपकी जानकारी के लिए बता दूं, Distance Learning एक ऐसा Education सिस्टम है जहापे घर से ही पढ़ाई को पूरी कर सकते हैं, Distance Learning का एक और फ़ायदा यह है की आपको हर रोज कॉलेज जाने की जरुरत नहीं पड़ेगी, अपने घर से ही Graduation, MBA की डिग्री ले सकते हो। आपको सिर्फ परीक्षा के दौरान ही कॉलेज जाना पड़ेगा।

हमारे भारतबर्ष में ऐसी बहुत सारी कॉलेज है जहासे Distance Learning की पढ़ाई करके Degree ले सकते है। हालाँकि Distance Learning के दृष्टिकोण से कुछ छात्रों को नुकसान भी पहुँचता है और इसमें कंप्यूटर या फिर मोबाइल इंटरनेट वाले छात्रों को संघर्ष करना पड़ता है। करोना काल से Distance Learning का उपयोग सबसे ज्यादा हो रही है। उदाहरण के लिए, Delhi में स्थित किसी विश्वविद्यालय में Admission लेने के बाद आप चाहे Delhi मै रहो या फिर कोई और शहर मैं कोई फर्क नहीं पड़ेगा ।

दूरवर्ती शिक्षा का अर्थ/Distance Learning Meaning in Hindi

Distance Learning यानि दूरस्थ शिक्षा का अर्थ है, दूर रहकर शिक्षा लेना और देना। यह शिक्षण की वह प्रणाली है जिसमे Teacher और Student को किसी स्थान विशेष अथवा समय विशेष पर उपस्थित हुए बिना अध्यापन तथा शिक्षण की गुणवत्तापूर्ण पहुच सुनिश्चित की जाती है।

दूरस्थ शिक्षा अनेक अर्थों में प्रयोग की जाती है. जैसे:

  1. पत्राचार शिक्षा (Correspondence Education)
  2. गृह अध्ययन (Home Study)
  3. बाहय अध्ययन (External Study)
  4. दूरस्थ शिक्षा (Distant Education)
  5. परिसर से बाहर अध्ययन (Off Campus Study)
  6. मुक्त अधिगम (Open Learning)
  7. स्वतन्त्र अध्ययन (Independent Study)
  8. बहु-माध्यम शिक्षा (Multi-media Education)

दूरवर्ती शिक्षा पर संचार विज्ञान की तकनीकों का काफी प्रभाव पड़ा है। शैक्षिक प्रसार प्रचार के क्षेत्र में संचार विज्ञान की विभिन्‍न तकनीकियों के प्रयोग ने दूरवर्ती शिक्षा की महत्ता एवं क्षेत्र में काफी वृद्धि कर दी है। दूरवर्ती शिक्षा एक गैर-पारम्परिक विधि के रूप में अत्यन्त लोकप्रिय होती जा रही है।

डिस्टेंस लर्निंग से ग्रेजुएशन कैसे करें

डिस्टेंस लर्निंग से ग्रेजुएशन कैसे करें?

डिस्टेंस लर्निंग से ग्रेजुएशन कैसे करें – और आपको क्या करना होगा। स्नातक की पढ़ाई करने के लिए सबसे पहले आपको यह मालूम करना होगा कि आसपास की कॉलेज में डिस्टेंस लर्निंग या डिस्टेंस एजुकेशन की सुबिधा है या नहीं । अगर नहीं है तो कोई बात नहीं आप दूर के किसी कॉलेज से भी कर सकते हैं।

जानकारी मिलने बाद आप उस कॉलेज में जाकर डिस्टेंस लर्निंग से एडमिशन करवा सकते हैं। फिर आपको कॉलेज जाने की जरूरत नहीं होगी । 4G के ज़माने मैं सभी के पास इंटरनेट है, इसलिए आप घर बैठे Internet से पढ़ाई कर सकते हैं।

डिस्टेंस लर्निंग की बिशेषताएँ

डिस्टेंस लर्निंग यानि दूरवर्ती शिक्षा की विशेषतायें इस प्रकार हैं –

  • दूरवर्ती शिक्षा, शिक्षण-अधिगम की एक सुसंगठित तथा सुव्यवस्थित प्रणाली हैं।
  • इसमें आमने-सामने बैठकर पढ़ने-पढ़ाने का बन्धन नहीं होता।
  • यह प्रणाली छात्रों की आवश्यकताओं, स्तर एवं उसके दैनिक कार्यों से जुड़ी रहती है।
  • दूरस्थ शिक्षा में विद्यार्थी को नियमित तौर पर किसी संसथान में जाकर पढाई करने की जरूरत नही होती।
  • यह एक ज्यादा लचीली विधि है।
  • छात्रों को इस विधि द्वारा, अपनी इच्छानुसार समय लगाकर, उसको अपनी योग्यता तथा गति के अनुसार पढ़ने के अवसर मित्रते हैं।
  • इस विधि में छात्रों के ऊपर बाहर से कुछ थोपा नहीं जाता वरन्‌ जो कुछ सिखाया जाता है, छात्र अपने प्रयत्नों से सीखते हैं।
  • यह विधि छात्रों के सुनिश्चित एवं विशिष्ट समूह के लिये पूर्व निर्धारित, सुनिश्चित तथा विशिष्ट उददेश्यों के लिये शिक्षा प्रदान करती है।
  • इसमें शैक्षिक तकनीकी के विभिन्‍न माध्यमों जैसे मुद्रित तथा अमुद्रित, दोनों प्रकार के माध्यमों का प्रयोग किया जाता है।
  • सूचना क्रांति और इंटरनेट के कारण दूरस्थ शिक्षा और आसान एवं प्रासंगिक हो गयी है।
  • अनुदेशन सामग्री के अध्ययन का उत्तरदायित्व छात्रों पर अधिक होता है।
  • इस प्रणाली में छात्रों को अधिगम शुरू करने और खत्म करने की अपनी क्षमता के अनुसार स्वतन्त्रता होती है।
  • दूरवर्ती शिक्षा की तकनीकों का प्रयोग सभी आयु वर्ग के लोगों को शिक्षित करने के लिये अनेक प्रकार के व्यावसायिक एवं अव्यावसायिक शास्त्रों से सम्बन्धित पाठ्यक्रमों के शिक्षण हेतु किया जाता है।
  • दूरवर्ती शिक्षा-स्व-अनुदेशन की प्रणाली पर आधारित होती है।
  • यह शिक्षा को देश के दूर-दूर तक के स्थानों तक पहुँचाने का प्रयास करती है।
  • दूरस्थ शिक्षा में सबसे महत्वपूर्णकार्य पाठ्यसामग्री तैयार करना है,क्योकि इसमें शिक्षक सामने नही होते इसलिए पाठ्यसामग्री ही शिक्षक का कार्य करती है।
  • पत्राचार से किये गए कोर्सों की महत्ता कही कम नहीं आकीं जाती है, ये भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने की रैगुलर कोर्स।

इन विशेषताओं के आधार पर कहा जा सकता है कि – दूरवर्ती शिक्षा एक ऐसी सुगठित व व्यवस्थित प्रणाली है,
जिससे शिक्षक और छात्रों में कितनी भी भौतिक दूरी क्‍यों न॒हो, शैक्षिक तकनीकी के मुद्रित/अमुद्रित माध्यमों का प्रयोग करते हुये, शिक्षा को छात्रों तक रोचक, बोधगम्य तथा वैज्ञानिक विधियों के द्वारा पूर्व निश्चित तथा विशिष्ट उद्देश्यों के अनुरूप शिक्षा प्रदान करने में अपना योगदान देती है।

दूरवर्ती शिक्षा स्व-अनुदेशन के सिद्धान्त पर आधारित, अन्त:प्रेरणा जाग्रत कर छात्रों को उनकी योग्यता, स्तर तथा आवश्यकताओं के अनुरूप उनकी गति एवं क्षमता के अनुसार, व्यावसायिक या अव्यावसायिक विषयों का शिक्षण देती है और उनके जीवन के लिये इस शिक्षण के द्वारा एक नयी रोशनी, नया प्रकाश तथा नवीन परिवर्तन लाने में सफल होती है।

डिस्टेंस लर्निंग/दूरवर्ती शिक्षा के लाभ

डिस्टेंस लर्निंग से ग्रेजुएशन कैसे करें
  • यह करोड़ों लोगों को सतत/अनवरत शिक्षा प्रदान करती है जो इस प्रकार की शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं।
  • दूरवर्ती शिक्षा, व्यक्ति के द्वार तक स्वयं जाकर उसे शिक्षित करने का प्रयास करती है।
  • साक्षरता के विकास में यह सहायक है।
  • अपनी आत्मोन्‍नति तथा व्यावसायिक उन्नति के लिये अपने ज्ञान तथा कौशल में वृद्धि करने की चाह रखने वालों के लिये उच्च शिक्षा के ये द्वार खोलती है।
  • गृहणियों के लिये शिक्षा सुलभ करके उनके गृह कार्य से सम्बन्धित कौशलों को समुन्नत बनाती है।
  • विकलांग, विशिष्ट तथा दूरस्थ क्षेत्र के निवासियों को भी दूरवर्ती शिक्षा समुचित शिक्षण एवं प्रशिक्षण प्रदान करती है।
  • दूरवर्ती शिक्षा, विज्ञान एवं तकनीकी के नवीनतम खोजों को प्रयोग कर स्वयं को अधिक व्यवस्थित रखती है और दूसरों को न्चजव.कंजम बनाने में सहायता देती है।
  • दूरवर्ती शिक्षा में पुनर्बलन तथा पृष्ठपोषण के लिये विशेष प्रावधान रखे गये हैं।
  • यह परम्परागत शिक्षा की तुलना में कम खर्चीली, सस्ती तथा अधिक उपयोगी शिक्षा है।
  • दूरवर्ती शिक्षा के माध्यम से शिक्षा-प्रक्रिया में सार्व्रॉकिकता/सार्वभौमिकता सम्भव होती है।
  • दूरवर्ती शिक्षा यथार्थ आवश्यकताओं के लिये एक समाधान है जो शिक्षा नीति में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन लाने में सक्षम एवं समर्थ हैं।
  • दूरवर्ती शिक्षा, औपचारिक-शिक्षा-प्रणाली पर छात्रों के दबाव को कम करती है और गुणात्मक सुधारों की ओर अग्रसरित करती है।
  • यह हमारे संविधान के इस प्रावधान को प्रोत्साहित कर बढ़ावा देती है कि सभी को शिक्षा के समान अवसर मिलने चाहिए।
  • यह प्रणाली प्राथमिक स्तर से उच्च स्तर तक की शिक्षा के लिये, हर स्तर पर उपयोगी सिद्ध हुई है।
  • दूरवर्ती शिक्षा व्यक्तियों को उनके खाली समय का समुचित विधि से उपयोग करना सिखाती है।
  • लोग अपनी अहर्ताओं को उन्‍नत कर अच्छी नौकरी पाने में समर्थ हो जाते हैं।
  • दूरवर्ती शिक्षा समुदाय के शिक्षा के स्तर में वृद्धि तथा शिक्षा के प्रति जागृति उत्पन्न करने में सहायक होती है।
  • दूरवर्ती शिक्षा अपने शिक्षण हेतु पाठ्य-सामग्री निर्माण के लिये अथवा विषय-वस्तु पर व्याख्यान देने के लिये अत्यन्त विशिष्ट विषय-विशेषज्ञों को आमन्त्रित करती है तथा उनका पूरा ल्लाभ छात्रों को देने का प्रयास करती है।

डिस्टेंस लर्निंग/दूरवर्ती शिक्षा के उद्देश्य/लक्ष्य

दूरवर्ती शिक्षा के प्रमुख ल्रक्ष्य तथा उददेश्य हैं –

  • दूरवर्ती शिक्षा का प्रमुख लक्ष्य है- देश के सुदूर कोने में स्थित विभिन्‍न स्थानों पर पढ़ने वालों के दवार-दवार तक शिक्षा पहुँचाना |
  • छात्रों के स्तर, आवश्यकताओं, योग्यताओं, क्षमताओं तथा आयु के अनुसार अधिगम सामग्री तैयार करना तथा निर्दिष्ट विधियों द्वारा छात्रों तक पहुँचाने का सफल प्रयास करना।
  • इस प्रणाली में ज्ञान व अधिगम को विभिन्‍न विधाओं के प्रयोग द्वारा छात्रों तक पहुँचाने का सपफल्र प्रयास करना।
  • ऐसे लोगों के लिये शिक्षा के अवसर पुन: प्रदान करना, जो किन्हीं कारणों से अपने जीवन में शिक्षित होने के अवसर खो चुके हैं।
  • विभिन्‍न कार्यों में त्रगे तथा विभिन्‍न व्यवसायों से जुड़े, विभिन्‍न व्यक्तियों तथा गृहणियों को उनकी आवश्यकतानुसार जीवनपर्यन्त शिक्षा प्राप्त हो सके, जिससे वे अपना शिक्षा स्तर तथा जीवन स्तर सुधार सकें।
  • दूरवर्ती शिक्षा के उपकरण का प्रयोग कर परम्परागत विद्यात्रयों, कॉलेजों तथा विश्वविद्यालयों पर कार्य का दबाव कम करने के लिये प्रयास करना।
  • संविधान में वर्णित *सभी को शिक्षा के समान अवसर’ सिद्धान्त को बढ़ावा देना।

डिस्टेंस लर्निंग/दूरवर्ती शिक्षा की आवश्यकता एवं महत्त्व

आज के युग में दूरवर्ती शिक्षा दिन-प्रतिदिन एक महत्त्वपूर्ण शिक्षा के साधन के रूप में विकास के पथ पर आगे बढ़ती चली जा रही है। निम्नांकित बिन्दु दूरवर्ती शिक्षा की आवश्यकता एवं महत्त्व के विशेष परिचायक हैं-

  • ऐसे लोग जो दूर-दराज के गाँवों में वन्य तथा पहाड़ी और दुर्गम प्रदेशों में रहते हैं और जहाँ शैक्षिक सुविधाओं का अभाव है या वे बहुत सीमित मात्रा में हैं, वहाँ दूरवर्ती शिक्षा, शिक्षा की ज्योति पैफलाने में एक शक्तिशाली साधन है।
  • दूरवर्ती शिक्षा ऐसे लोगों के लिये भी वरदान है जो अपनी शिक्षा को आगे जारी रखने के ल्रिये अन्यत्र जाने में पूर्णतया असमर्थ है।
  • दूरवर्ती शिक्षा उन लोगों के लिये भी एक उत्तम साधन है जो किसी कारणवश (समय से पूर्व) जीविकोपार्जन के लिये किसी नौकरी या धन्धे में लग जाते हैं और औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाये हैं।
  • ऐसे लोग जो किसी व्यवसाय/धन्धे या नौकरी में लगे हैं परन्तु अपने स्व-सन्तोष (Self Satisfaction) तथा Professional Development के लिये अपने विषय से सम्बन्धित नवीन संप्रत्ययों, नव-सूचनाओं तथा नयी तकनीकियों आदि का ज्ञान प्राप्त करना चाहते हैं। इस प्रकार दूरवर्ती शिक्षा राष्ट्रीय उत्पादन को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • दूरवर्ती शिक्षा, निरक्षर किसानों, मजदूरों, गृहणियों तथा विकलांग व्यक्तियों आदि के लिये भी महत्त्वपूर्ण है जो औपचारिक विद्यालयों में शिक्षा प्राप्त करने में असमर्थ रहे हैं।
  • दूरवर्ती-शिक्षा, औषचारिक शिक्षा एक प्रभावशील विकल्प है, जो आजीवन शिक्षा से लेकर शिक्षा के सार्वभौमीकरण तक को अपने अन्दर समेटे रहता है। दूसरे शब्दों में इसका क्षेत्र काफी व्यापक है।
  • दूखवर्ती शिक्षा, शैक्षिक तथा व्यावसायिक अवसरों की समानता प्रदान करने वाला एक सशक्त माध्यम है।
  • दूरवर्ती शिक्षा, एक गतिमान भविष्योन्मुखी सांगठनिक संरचना विकसित करने का एक अच्छा अवसर है।
  • दूरवर्ती शिक्षा, बहुमाध्यमीय उपागम का प्रयोग करती है – फलस्वरूप छात्रों की अधिगम प्रक्रिया को अधिक बल मिलता है।
  • दूरवर्ती शिक्षा ऐसे लोगों के लिये भी महत्त्वपूर्ण है जिन्हें ज्ञान के उन्‍नयन के लिये वुफछ अतिरिक्त शैक्षिक प्रशिक्षण की आवश्यकता हो।
  • समृद्ध समाजों के लोगों (जिनके पास पर्याप्त समय/अवकाश हो और जो कोई शौक पूरा करना चाहते हों) के ये दूरवर्ती शिक्षा एक महत्त्वपूर्ण उपकरण है।
  • दूरवर्ती शिक्षा छात्र-केन्द्रित या व्यक्ति-केन्द्रित व्यवहार है, अत: इसके अन्तर्गत छात्रों के स्तरों के अनुरूप बेहतर अधिगम सामग्री देने में दूरवर्ती शिक्षा सफल सिद्ध हुई है।
  • दूखर्ती शिक्षा से ज्ञानात्मक, भावात्मकः तथा मनोवैज्ञानिक, तीनों प्रकार के उददेश्यों की प्राप्ति सम्भव होती है।
  • दूरवर्ती शिक्षा छात्रों में स्वाध्याय की प्रवृत्ति विकसित करती है, अन्त:अभिप्रेरणा जाग्रत करती है, उन्हें अपने विषय में नवीनतम सूचनायें प्रदान कर दक्षता उत्पन्न करती है तथा जीवन की शैली में वांछित परिवर्तन लाती है।

डिस्टेंस लर्निंग से ग्रेजुएशन करने के लिए यूनिवर्सिटी

Finally, आपको पता चल गया है कि डिस्टेंस लर्निंग से ग्रेजुएशन कैसे करें? और अभी यह सवाल आता है कि कौन-कौन से विश्वविद्यालय है जहासे ग्रेजुएशन कर सकते है। निचे हमने ऐसे विश्वविद्यालय पर चर्चा किया जो डिस्टेंस लर्निंग की सुबिधा देते हैं:

  • इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय

सबसे ज्यादा Popular यूनिवर्सिटी मैं से एक है इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, 1985 में इस विश्वविद्यालय की स्थापना हुयी थी। यह यूनिवर्सिटी पे भारत के अलावा अन्य देशों के Students भी पढ़ाई करते हैं। ।

जब डिस्टेंस लर्निंग से पढाई करने की बात आती है तो इस विश्वविद्यालय का नाम सबसे पहले आता है और डिस्टेंस लर्निंग एजुकेशन के मामले में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से बेहतर कोई यूनिवर्सिटी नहीं है। यही कारन है जो डिस्टेंस लर्निंग से ग्रेजुएशन करना चाहते हैं वो इस यूनिवर्सिटी में एडमिशन होने की कोसिस करते हैं।

  • सिम्बायोसिस सेंटर फॉर डिस्टेंस लर्निंग

महाराष्ट्र के पुणे में स्थित विश्वविद्यालय जिसका नाम है सिम्बायोसिस सेंटर फॉर डिस्टेंस लर्निंग । इस विश्वविद्यालय की स्थापना 2020 में हुई थी। डिस्टेंस लर्निंग के जरिये डिग्री प्राप्त करने के लिए, यह विश्वविद्यालय सबसे अच्छा है।

  • यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र ओपन यूनिवर्सिटी

महाराष्ट्र के नासिक में स्थित है यह विश्वविद्यालय और इस विश्वविद्यालय की स्थापना जुलाई, 1989 में हुई थी। डिस्टेंस लर्निंग की सुविधा इस विश्वविद्यालय मैं भी उपलब्ध है।

  • महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी

हरियाणा के रोहतक में मौजूद है महर्षि दयानन्द यूनिवर्सिटी, और इसकी स्थापना 1976 में की हुई थी। यह एक सार्वजनिक तथा राज्य स्तरीय विश्वविद्यालय है।

  • स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (दिल्ली विश्वविद्यालय)

भारत की सबसे बड़ी शैक्षणिक संस्थानों में से एक है स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (दिल्ली विश्वविद्यालय) किउंकि यह विश्वविद्यालय प्रत्येक वर्ष 1 लाख 50 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स को एडमिशन करवाते हैं और यहापर 10 लाख से अधिक विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं। इस विश्वविद्यालय की स्थापना साल 1962 में हुई थी, डिस्टेंस लर्निंग एजुकेशन के लिए यह बहुत बढ़िया यूनिवर्सिटी है।

  • नेताजी सुभाष ओपन यूनिवर्सिटी

नेताजी सुभाष ओपन यूनिवर्सिटी की मुख्यालय कोलकाता में है और इसकी स्थापना साल 1997 में हुई थी। इस विश्वविद्यालय मैं डिस्टेंस लर्निंग एजुकेशन की सुविधा है और प्रत्येक वर्ष जुलाई के महीने में एडमिशन प्रक्रिया शुरू होती है।

  • मध्य प्रदेश भोज ओपन यूनिवर्सिटी

इस यूनिवर्सिटी की स्थापना 1991 में हुआ था। इस विश्वविद्यालय से कोई सारे कोर्स करने की सुबिधा उपलब्ध है, और डिस्टेंस लर्निंग से एजुकेशन लेकर पढ़ाई कर सकते हो।

  • कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी

इस यूनिवर्सिटी की स्थापना साल 1996 में हुई थी और इस विश्वविद्यालय से बाकि विश्वविद्यालय की तरह विभिन्न प्रकार कोर्स की सुबिधा है। इस यूनिवर्सिटी की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें डिस्टेंस लर्निंग के द्वारा अध्यन करने की सुविधा है।

  • डॉ. भीम राव अंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी

साल 1982 में डॉ॰ भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी। आप इस यूनिवर्सिटी से कई सरे कोर्स की सुबिधा ले सकते है और साथ साथ इस यूनिवर्सिटी मैं डिस्टेंस लर्निंग की सुविधा मौजूद है।

  • तमिलनाडु ओपन यूनिवर्सिटी

2002 में स्थापना हुई थी तमिलनाडु ओपन यूनिवर्सिटी की और इस विश्वविद्यालय की सबसे बड़ा उद्देश्य है लोगों को उच्च शिक्षा प्रदान करना।

डिस्टेंस लर्निंग से जुड़ी सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवाल (FAQ):

डिस्टेंस लर्निंग क्या है?

डिस्टेंस लर्निंग एक ऐसा Education सिस्टम है जहासे आप घर बैठे Graduation, MBA कर सकते हैं, और इसका फ़ायदा यह है की आपको कॉलेज जाने की जरुरत नहीं है

डिस्टेंस लर्निंग से ग्रेजुएशन कर सकते है?

Yes, आप डिस्टेंस लर्निंग के जरिये घर बैठे ग्रेजुएशन की डिग्री ले सकते हो

दूरस्थ शिक्षा की मान्यता

यदि आपकी Distance Learning की विश्वविद्यालय UGC और AICTE द्वारा अनुमोदित है, तो आपकी दूरस्थ शिक्षा की मान्यता दिया जायेगा अन्यथा नहीं दिया जायेगा

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